अथर्ववेद काण्ड 9
अथर्ववेद के काण्ड 9 के मंत्र — Sanskrit में रचित, Hindi और English अनुवाद के साथ। यहाँ पढ़ें मूल संस्कृत मंत्र, उनका अर्थ और विश्लेषण।
Kanda 9 · Verse 1
उष्मितां प्रतिमितामथो परिमितामुत । शालाया विश्वावाराया नृद्धानि वि कृतामसि ॥ १ ॥
Umitāṁ pratimitāmatho parimitāmuta. Śālāyā viśvāvārāyā naddhāni vi cṛtāmasi.
यह श्लोक एक विशाल और सर्वव्यापीशाला (विश्व की रहने की जगह) का वर्णन करता है, जो सभी दिशाओं में फैली हुई है और सभी के लिए खुली है। यह उस दिव्य स्थान का प्रतीक है जहाँ सभी प्राणी निवास करते हैं।
Kanda 9 · Verse 2
सप्तलहन्मृषभं घृतेन कामं शिक्षाामि हविषाज्येन । नीचैः सप्तान्मम पादय त्वमभिष्ठतो महता वीर्येण ॥ १ ॥
O Lord, with ghee and offerings of butter, I worship You with devotion. May You, with great power, protect me from all sides.
हे ईश्वर, मैं आपको घृत और हविष्य से युक्त अन्न से प्रसन्न करता हूँ। आप अपनी महान शक्ति से मेरे सात लोकों को अपने चरणों में झुका दें।